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जपजी साहिब • अध्याय 1 • श्लोक 12
ਸੁਣਿਐ ਈਸਰੁ ਬਰਮਾ ਇੰਦੁ ॥ ਸੁਣਿਐ ਮੁਖਿ ਸਾਲਾਹਣ ਮੰਦੁ ॥ ਸੁਣਿਐ ਜੋਗ ਜੁਗਤਿ ਤਨਿ ਭੇਦ ॥ ਸੁਣਿਐ ਸਾਸਤ ਸਿਮ੍ਰਿਤਿ ਵੇਦ ॥ ਨਾਨਕ ਭਗਤਾ ਸਦਾ ਵਿਗਾਸੁ ॥ ਸੁਣਿਐ ਦੂਖ ਪਾਪ ਕਾ ਨਾਸੁ ॥
परमात्मा का नाम सुनने से ही शिव, ब्रह्मा तथा इन्द्र आदि उत्तम पदवी को प्राप्त कर सके हैं। मंदे लोग यानी कि बुरे कर्म करने वाले मनुष्य भी नाम को श्रवण करने मात्र से प्रशंसा के लायक हो जाते हैं। नाम के साथ जुड़ने से योगादि तथा शरीर के विशुद्ध, मणिपूरक, मूलाधार आदि षट्-चक्र के रहस्य का बोध हो जाता है। नाम सुनने से षट्-शास्त्र, (सांख्य, योग, न्याय आदि), सत्ताईस स्मृतियों (मनु, याज्ञवल्कय स्मृति आदि) तथा चारों वेदों का ज्ञान उपलब्ध होता है। हे नानक! संत जनों के हृदय में सदैव आनंद का प्रकाश रहता है। परमात्मा का नाम सुनने से समस्त दुखों व दुष्कर्मों का नाश होता है।
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