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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 95
मंगल भूषन बसन मंजु तन सोहहिं। देखि मूढ महिपाल मोह बस मोहहिं॥
श्रीजानकीजी के सुन्दर शरीर में मंगलमय (विवाहोचित) वस्त्र और आभूषण सुशोभित हैं। उन्हें देखकर मूर्ख राजा लोग मोहवश मोहित हो जाते हैं।
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