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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 88
देबि सोच परिहरिय हरष हियँ आनिय। चाप चढ़ाउब राम बचन फुर मानिय॥
हृदय में आनन्द मनाइये। यह वचन सत्य मानिये कि धनुष को श्रीरामचन्द्रजी ही चढ़ायेंगे।
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