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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 72
काकपच्छ रिषि परसत पानि सरोजनि। लाल कमल जनु लालत बाल मनोजनि॥
मुनिवर अपने करकमलों से उनकी अलकों का स्पर्श करते हैं, जिससे ऐसा जान पड़ता है, मानो अरुण कमल बालक कामदेवों का लालन करते हों।
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