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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 65
भे निरास सब भूप बिलोकत रामहि। पन परिहरि सिय देब जनक बरु स्यामहि॥
श्रीरामचन्द्रजी को देखकर सब राजा निराश हो गये कि अब तो राजा जनक शर्त त्यागकर जानकी को साँवले वर के साथ ही ब्याह देंगे।
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