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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 64
एक कहहिं कुँवरु किसोर कुलिस कठोर सिव धनु है महा। किमि लेहिं बाल मराल मंदर नृपहि अस काहुँ न कहा॥
कोई कहती हैं कि ‘कुँवर बालक हैं और शिवजी का धनुष वज्र के समान अत्यन्त कठोर है। राजा से यह बात किसी ने नहीं कही कि हंस के बच्चे पर्वत किस प्रकार उठायेंगे।'
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