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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 63
जग जनमि लोयन लाहु पाए सकल सिवहि मनावहीं। बरु मिलौ सीतहि साँवरो हम हरषि मंगल गावहीं॥
'हमने जगत् में जन्म लेकर नेत्रों का लाभ पाया।’ यों कहकर सब शिवजी से मनाती हैं कि सीता को साँवला वर मिले और हम लोग हर्षित होकर मंगल गावें।
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