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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 61
राम-लखन-छबि देखि मगन भए पुरजन। उर अनंद जल लोचन प्रेम पूलक तन॥
श्रीरामचन्द्रजी और लक्ष्मणजी की शोभा को देख पुरजन आनन्दित हो गये। उनके हृदय में आनन्द, नेत्रों में जल और शरीर में प्रेमजनित रोमांच हो आया।
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