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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 60
कटि निषंग कर कमलन्हि धरें धनु-सायक। सकल अंग मन मोहन जोहन लायक॥
वे कमर में तरकस और करकमलों में धनुषबाण धारण किये हैं। इस प्रकार उनके सभी अंग मन को मोहने वाले और दर्शनीय हैं।
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