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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 6
दानव देव निसाचर किंनर अहिगन। सुनि धरि-धरि नृप बेष चले प्रमुदित मन॥
दैत्य, देवता, राक्षस, किन्नर और नागगण भी स्वयंवर का समाचार सुन, राजवेष धारण कर-कर के प्रसन्नचित्त से चले।
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