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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 58
नासा चिबुक कपोल अधर रद सुंदर। बदन सरद बिधु निंदक सहज मनोहर॥
उनकी नाक, ठोड़ी, कपोल, होठ और दाँत सुन्दर हैं तथा शरत्-काल के चन्द्रमा की निन्दा करने वाला उनका मुख स्वभाव से ही मन को हरने वाला है।
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