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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 57
तिलकु ललित सर भ्रकुटी काम कमानै। श्रवन बिभूषन रुचिर देखि मन मानै॥
उनकी भ्रुकुटिरूप कामदेव की कमान पर सुन्दर तिलक बाण के समान सुशोभित है। उनके सुन्दर कर्णभूषण देखकर मन प्रसन्न हो जाता है।
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