लागे बिसूरन समुझि पन मन बहुरि धीरज आनि कै।
लै चले देखावन रंगभूमि अनेक बिधि सनमानि कै॥
अपनी शर्त का विचार करके महाराज जनक सोच में पड़ गये। फिर मन में धैर्य धारण कर वे अनेक प्रकार से सम्मान करके उन्हें रंगभूमि दिखलाने को ले चले।
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