रूप सील बय बंस राम परिपूरन।
समुझि कठिन पन आपन लाग बिसूरन॥
श्रीरामचन्द्रजी सुन्दरता, शील, आयु और वंश में परिपूर्ण हैं (अर्थात् इन दृष्टियों से इनमें कोई कमी नहीं है)। किंतु अपनी कठिन शर्त जानकर राजा जनक सोच में पड़ गये।
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