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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 50
कहेउ सप्रेम पुलकि मुनि सुनि महिपालक। ए परमारथ रूप ब्रह्ममय बालक॥
तब मुनीश्वर ने पुलकित होकर प्रेमपूर्वक कहा–’हे पृथ्वीपते! ये बालक ब्रह्ममय, अतएव परमार्थस्वरूप ही हैं।'
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