बिषय बिमुख मन मोर सेइ परमारथ।
इन्हहिं देखि भयो मगन जानि बड़ स्वारथ॥
(निरन्तर) परमार्थ-चिन्तन करने से मेरा मन विषयों से विमुख हो गया है, किंतु इन्हें देखकर वह अपना बड़ा भारी स्वार्थ जान आनन्द में मग्न हो गया है।
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