लै गयउ रामहि गाधि सुवन बिलोकि पुर हरषे हिएँ।
सुनि राउ आगे लेन आयउ सचिव गुर भूसुर लिएँ॥
गाधिसुत श्रीविश्वामित्रजी रामचन्द्रजी को लेकर गये। वे (जनक) पुर को देखकर हृदय में अत्यन्त प्रसन्न हुए। विश्वामित्रजी का आगमन सुन महाराज जनक मन्त्री, गुरु और ब्राह्मणों को लेकर आगे लेने आये।
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