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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 41
बिप्र साधु सुर काजु महामुनि मन धरि। रामहि चले लिवाइ धनुष मख मिसु करि॥
फिर ब्राह्मण, साधुओं और देवताओं का कार्य मन में रख महामुनि विश्वामित्रजी धनुष-यज्ञ के बहाने श्रीरामचन्द्रजी को लेकर चले।
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