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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 40
मारि निसाचर निकर जग्य करवायउ। अभय किए मुनिबंद जगत जसु गायउ॥
वहाँ राक्षसों के समूह का नाश करके विश्वामित्रजी का यज्ञ पूर्ण करवाया और मुनि-समूहको निर्भय किया। भगवान् के इस सुयश को सारे संसार ने गाया।
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