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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 39
मन लोगन्हके करत सुफल मन लोचन। गए कौसिक आश्रमहिं बिप्र भय मोचन॥
इस प्रकार विप्र-भय-मोचन श्रीरामचन्द्रजी मार्ग के लोगों के मन और नेत्रों को सफल करते कौशिकमुनि के आश्रम में गये।
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