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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 36
सकुचहिं मुनिहि सभीत बहुरि फिरि आवहिं। तोरि फूल फल किसलय माल बनावहिं॥
और फिर मुनि से डरकर संकुचित हो लौट जाते हैं तथा फल-फूल और नये पत्तों को तोड़कर माला बनाते हैं।
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