वे क्रमशः श्याम और गौर तथा किशोर अवस्था वाले हैं और दोनों ही मानो मनोहरता के भंडार हैं। ऐसा जान पड़ता है, मानो ब्रह्माजी ने सारी शोभा को बटोरकर ही इन्हें रचा है।
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