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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 31
होहिं सगुन सुभ मंगल जनु कहि दीन्हेउ। राम लखन मुनि साथ गवन तब कीन्हेउ॥
तरह-तरह के शुभ शकुन होने लगे, मानो उन्होंने भावी मंगल की सूचना दे दी। तब श्रीरामचन्द्रजी और लक्ष्मणजी ने विश्वामित्र मुनि के साथ प्रस्थान किया।
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