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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 30
चलत सकल पुर लोग बियोग बिकल भए। सानुज भरत सप्रेम राम पायन्ह नए॥
उनके चलते समय सकल पुरवासी वियोग से विह्वल हो गये और छोटे भाई शत्रुघ्न के सहित भरतजी ने श्रीरामचन्द्र के चरणों में प्रणाम किया।
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