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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 3
पनु धरेउ सिव धनु रचि स्वयंबर अति रुचिर रचना बनी। जनु प्रगटि चतुरानन देखाई चतुरता सब आपनी॥
राजा ने शिव-धनुष चढ़ाने की शर्त रखकर स्वयंवर रचा, जिसकी सजावट अत्यन्त सुन्दर थी, मानो ब्रह्मा ने अपना सम्पूर्ण कौशल प्रत्यक्ष करके दिखा दिया।
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