पाइ मातु पितु आयसु गुरु पायन्ह परे।
कटि निषंग पट पीत करनि सर धनु धरे॥
माता-पिता की आज्ञा पाकर श्रीराम और लक्ष्मणजी कमर में तरकस और पीताम्बर तथा हाथों में धनुष और बाण लिये गुरु के चरणों पर गिरे।
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