दीन बचन बहु भाँति भूप मुनि सन कहे।
सौंपि राम अरु लखन पाय पंकज गहे॥
इस प्रकार महाराज ने मुनि से अनेक प्रकार के दीन वचन कहे और श्रीरामचन्द्र एवं लक्ष्मणजी को उन्हें सौंपकर उनके चरण-कमल पकड़ लिये।
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