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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 25
नाथ मोहि बालकन्ह सहित पुर परिजन। राखनिहार तुम्हार अनुग्रह घर बन॥
हे नाथ! घर और वन में नगर और नगरवासियों के सहित मेरी और इन बालकों की रक्षा करने वाली तो आपकी कृपा ही है।
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