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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 232
उपबीत ब्याह उछाह जे सिय राम मंगल गावहीं। तुलसी सकल कल्यान ते नर नारि अनुदिन पावहीं॥
जो लोग भगवान् के यज्ञोपवीत और श्रीसीताराम के विवाहोत्सव-सम्बन्धी मंगल का गान करते हैं, गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि वे स्त्री-पुरुष दिनोदिन सब प्रकार का कल्याण प्राप्त करते हैं।
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