बिकसहिं कुमुद जिमि देखि बिधु भइ अवधसुख सोभामई।
एहि जुगुति राम बिबाह गावहिं सकल कबि कीरति नई॥
जैसे चन्द्रमा को देखकर कुमुदिनियाँ खिल उठती हैं वैसे ही सब स्त्रियाँ आनन्दित हैं। उस समय अयोध्या सुखी और शोभामयी हो रही हैं। इस प्रकार श्रीरामचन्द्रजी के विवाह की सुन्दर नवीन कीर्ति को कवि लोग गाते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जानकी मंगल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जानकी मंगल के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।