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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 229
नेगचार करि दीन्ह सबहि पहिरावनि। समधी सकल सुआसिनि गुरतिय पावनि॥
रीति के अनुसार नेग-चार करके अपने सम्बन्धियों को, सब सुवासिनियों को, अपने से बड़ी स्त्रियों को और पौनियों (अपने आश्रित निम्न जाति की स्त्रियों)-को पहिरावनी दी।
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