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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 228
जाचक कीन्ह निहाल असीसहिं जहँ तहँ। पूजे देव पितर सब राम उदय कहँ॥
याचकों को (मनमाना दान देकर) निहाल कर दिया। वे जहाँ-तहाँ आशीर्वाद देते हैं और श्रीरामचन्द्रजी की उन्नति के लिये देवता और पितृगण सभी का पूजन किया गया।
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