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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 227
भवन आनि सनमानि सकल मंगल किए। बसन कनक मनि धेनु दान बिप्रन्ह दिए॥
उन्हें सम्मानपूर्वक राजमहल में लाकर सब प्रकार के मंगलकृत्य किये और ब्राह्मणों को वस्त्र, सोना, मणि और गौएँ दान की।
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