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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 223
बधुन सहित सुत चारिउ मातु निहारहिं। बारहिं बार आरती मुदित उतारहिं॥
माताएँ वधुओं के सहित चारों पुत्रों को निहारती हैं और प्रसन्न होकर बारंबार उनकी आरती उतारती हैं।
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