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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 222
मन मुदित कौसल्या सुमित्रा सकल भूपति भामिनी। सजि साजु परिछन चलीं रामहि मत्त कुंजर गामिनी॥
कौसल्या, सुमित्रा आदि सम्पूर्ण राजमहिषियाँ मन में अत्यन्त आनन्दित हैं। मतवाले हाथियोंकी-सी चाल से चलने वाली वे महारानियाँ सब सामग्री सजाकर श्रीरामचन्द्रजी का परिछन करने चलीं।
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