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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 221
मंगल बिटप मंजुल बिपुल दधि दूब अच्छत रोचना। भरि थार आरति सजहिं सब सारंग सावक लोचना॥
बहुत-से सुन्दर मंगलमय वृक्ष लगाये गये हैं, मृगशावक के-से नेत्रों वाली समस्त स्त्रियाँ थालों में दही, दूब, अक्षत और गोरोचन भरकर आरती सजाती हैं तथा
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