जबहिं मुनीस महीसहि काजु सुनायउ।
भयउ सनेह सत्य बस उतरु न आयउ॥
जब मुनीश्वर ने महाराज को अपना कार्य सुनाया, तब महाराज स्नेह और सत्य के बन्धन से जडीभूत हो गये, उनसे कुछ भी उत्तर देते न बना।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जानकी मंगल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जानकी मंगल के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।