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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 22
जबहिं मुनीस महीसहि काजु सुनायउ। भयउ सनेह सत्य बस उतरु न आयउ॥
जब मुनीश्वर ने महाराज को अपना कार्य सुनाया, तब महाराज स्नेह और सत्य के बन्धन से जडीभूत हो गये, उनसे कुछ भी उत्तर देते न बना।
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