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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 219
चौकैं पूरै चारु कलस ध्वज साजहिं। बिबिध प्रकार गहागह बाजन बाजहिं॥
सुन्दर चौक पूरकर कलश और ध्वजाएँ सजाते हैं। अनेक प्रकार के आनन्दमय बाजे बज रहे हैं।
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