एहि बिधि ब्याहि सकल सुत जग जसुछायउ।
मग लोगन्हि सुख देत अवधपति आयउ॥
इस प्रकार सब पुत्रों का ब्याह करके उन्होंने समस्त संसार में अपने सुयश का विस्तार किया और (फिर) रास्ते में लोगों को सुख देते हुए अवधपति दशरथजी (अपनी राजधानी को) लौट आये।
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