सो समौ कहत न बनत कछु सब भुवन भरिकरुना रहे।
तब कीन्ह कोसलपति पयान निसान बाजेगहगहे॥
उस अवसर के विषय में कुछ कहते नहीं बनता; सम्पूर्ण लोक करुणा (शोक)-से भर गये। तब कोसलपति महाराज दशरथ ने प्रस्थान किया और आनन्दपूर्वक नगारे बजने लगे।
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