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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 210
कृपा सिंधु सुख सिंधु सुजान सिरोमनि। तात समय सुधि करबि छोह छाड़ब जनि॥
हे कृपासिन्धु, हे सुखसागर, हे सुजान-शिरोमणि, हे तात! समय-समय पर आप हमारी याद करते रहियेगा। (हमारे प्रति) स्नेह न त्यागियेगा।
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