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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 207
बिलग न मानब मोर जो बोलि पठायउँ। प्रभु प्रसाद जसु जानि सकल सुख पायउँ॥
मैंने आपको बुला भेजा—’मेरे इस व्यवहार से बुरा न मानियेगा। प्रभु (आप)-की (ही) कृपा से आपका सुयश जानकर मैंने सब प्रकार का सुख पाया है।'
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