कहेउ जनक कर जोरि कीन्ह मोहि आपन।
रघुकुल तिलक सदा तुम उथपन थापन॥
महाराज जनक ने हाथ जोड़कर कहा—’आपने मुझे अपना लिया, हे रघुकुलतिलक! आप सदा ही उजड़ों को बसाने वाले हैं।'
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