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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 206
कहेउ जनक कर जोरि कीन्ह मोहि आपन। रघुकुल तिलक सदा तुम उथपन थापन॥
महाराज जनक ने हाथ जोड़कर कहा—’आपने मुझे अपना लिया, हे रघुकुलतिलक! आप सदा ही उजड़ों को बसाने वाले हैं।'
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