प्रेम पुलकि कहि राय फिरिय अब राजन।
करत परस्पर बिनय सकल गुन भाजन॥
महाराज दशरथ ने प्रेम से पुलकित होकर कहा —’राजन्! अब आप लौट जाइये।’ फिर समस्त गुणों के पात्र दोनों महाराज परस्पर विनय करने लगे।
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