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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 203
परे निसानहि घाउ राउ अवधहिं चले। सुर गन बरषहिं सुमन सगुन पावहिं भले॥
नगारों पर चोट पड़ने लगी और महाराज दशरथ अयोध्या के लिये चल पड़े। देवगण फूल बरसाते हैं और अच्छे-अच्छे (शुभसूचक) सगुन होते हैं।
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