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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 201
जन जानि करब सनेह बलि, कहि दीन बचन सुनावहीं। अति प्रेम बारहिं बार रानी बालिकन्हि उरलावहीं॥
'हम आपकी बलिहारी जाती हैं, आप अपना सेवक जानकर इनपर स्नेह रखियेगा’ यों कहकर रानियाँ दीन वचन सुनाती हैं और अत्यन्त प्रेम से – (चारों) बालिकाओं को बार-बार हृदय से लगाती हैं।
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