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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 198
मागेउ बिदा राम तब सुनि करुना भरीं। परिहरि सकुच सप्रेम पुलकि पायन्ह परी॥
तब श्रीरामचन्द्रजी ने (उन सबसे) विदा माँगी। यह सुनकर वे सब करुणा (शोक)-से भर गयीं और संकोच छोड़कर प्रेमपूर्वक उनके चरणों पर गिर गयीं।
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