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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 195
खरभर नगर नारि नर बिधिहि मनावहिं। बार बार ससुरारि राम जेहि आवहिं॥
नगर में खलबली मच गयी, समस्त स्त्री-पुरुष विधाता से यही मनाते थे कि श्रीरामचन्द्रजी बारबार ससुराल आया करें।
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