प्रात बरात चलिहि सुनि भूपति भामिनि।
परि न बिरह बस नींद बीति गइ जामिनि॥
महाराज की रानियों ने जब सुना कि प्रातःकाल बरात चली जायगी, तब भावी वियोग की चिन्ता से उन्हें नींद न पड़ी और सारी रात बीत गयी।
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