करि करि बिनय कछुक दिन राखि बरातिन्ह।
जनक कीन्ह पहुनाई अगनित भाँतिन्ह॥
महाराज जनक ने विनती कर-करके कुछ दिन बरातियों को रोककर रखा और उनकी असंख्य प्रकार से पहुनाई की।
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